यौन रोग सिफिलिस के क्या हैं लक्षण और इलाज?
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डॉ. रमेश गुप्ता, सेक्स एक्सपर्ट, कीर्ति नगर, नई दिल्ली। सवाल: मैं 28 वर्षीय एक नौकरीपेशा युवक हूं। मैंने अपने दोस्तों से यौन रोग के बारे में काफी सुना है। मैं जानना चाहता हूं कि क्या सिफिलिस भी अन्य यौन रोगों की तरह संक्रामक और खतरनाक होता है? क्या यह स्त्री - पुरुष दोनों को हो सकता है? इस रोग की क्या पहचान होती है? जवाब : जी हां, सिफिलिस एक संक्रामक यौन रोग है। इस रोग के उत्पन्न होने का कारण ट्रेपोनेमा पैलिडम नामक जीवाणु होता है। यह रोग सिफिलिस से संक्रमित स्त्री-पुरुष के साथ संभोग करने से यह स्वस्थ व्यक्ति को आसानी से हो जाता है। ज्यादातर एक से अधिक स्त्री-पुरुषों से शारीरिक संबंध बनाने वाले व्यक्ति, वेश्या और कॉलगर्ल्स इस रोग से पीड़ित होते हैं। यह रोग चुम्बन से भी फैल सकता है। यह स्त्री-पुरुष दोनों को होता है। शुरुआत में रोग के लक्षण दिखाई नहीं देते इस रोग के शरीर में प्रवेश करने और रोग के लक्षण प्रकट होने में 10 से 80 दिनों का समय लग सकता है। संभोग करने के बाद सिफिलिस के जीवाणु एक ही दिन में लसिकवाहिनियों में और 3-4 दिनों में सारे शरीर में पहुंच जाते हैं। इसके बावजूद आमतौर पर कोई लक्षण स्पष्ट तौर पर दिखाई नहीं देते हैं। रोग की प्रथम अवस्था के लक्षण सिफिलिस से संक्रमित होने के लगभग एक माह बाद इस रोग के प्रथमावस्था के लक्षण लिंग पर लाल रंग के चकत्ते के रूप में दिखाई पड़ता है, जो बाद में धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। स्पर्श करने पर यह थोड़ा कड़ा होता है, जिसके कारण इसे "हार्ड शेंकर " कहा जाता है, जिसमें दर्द नहीं होता है। पुरुषों में जहां ये चकत्ते लिंग, लिंगमुंड के अंदर या बाहर होते हैं, वहीं स्त्रियों में भगोष्ठ की संधि पर, योनि द्वार और गर्भाशय के मुख पर होते हैं। जरा-सा घर्षण होने से ये चकत्ते घाव बन जाते हैं। रोग की दूसरी अवस्था के लक्षण रोग की दूसरी अवस्था 4 से 6 सप्ताह बाद शुरू होती है, जिसमें जीवाणु और उसका विष सारे शरीर में पहुंच जाता है। जिसके कारण त्वचा पर लाल-लाल चकत्तों का उभरना, उसमें जख्म बनना, जख्मों में दर्द या खुजली न होना, सिरदर्द, गले में दर्द, भूख न लगना, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, हीमोग्लोबिन की समस्या, जोड़ की ग्रंथियों में सूजन, बुखार आना, मुंह, होंठ, जननांग और मलद्वार के आस-पास घाव होना जैसी तकलीफें होने लगती हैं । रोग की तीसरी अवस्था के लक्षणरोग की तीसरी अवस्था के लक्षण, दूसरी अवस्था के ठीक होने के बाद 3 से 6 वर्ष बाद शुरू होते हैं। इसमें जो घाव होते हैं, उसे "गम्मा" कहते हैं। त्वचा, मांसपेशियों, अंडकोष, हड्डियों तक के इससे प्रभावित होने के कारण ये बहुत घातक होते हैं। शरीर के अंग इन घावों के कारण बदरंग होने लगते हैं। इस अवस्था में आंखों की रोशनी भी जा सकती है। बच्चे विकलांग या दृष्टिहीन पैदा होते हैं। समय पर समुचित इलाज करवाना जरूरीसिफिलिस का उपचार दवाओं से हो जाता है। समय पर पूरा इलाज करवाने से बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। रोगी को इस रोग के लक्षण दिखाई देने पर इलाज करवाने में देर नहीं करनी चाहिए। क्योंकि रोग बढ़ जाने पर लकवा, स्नायु दुर्बलता, मेरूमज्जा का क्षय, नपुंसकता, कैंसर और मिर्गी जैसे रोगों के होने की संभावना रहती है।सिफिलिस से पीड़ित व्यक्ति को जब तक वह ठीक नहीं हो जाता, तब तक सेक्सुअल रिलेशन बनाने से दूर रहना चाहिए।
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