पुरुषों के वीर्य (सीमेन) का इतना अधिक महत्व क्यों है?
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डॉ. रमेश गुप्ता, सेक्स एक्सपर्ट, कीर्ति नगर, नई दिल्ली। सवाल: मैं 27 वर्षीय विवाहित युवक हूं। मैं जानना चाहता हूं कि पुरुष के (सीमेन) को इतना अधिक महत्व क्यों दिया जाता है? पुरुषों के शरीर में वीर्य का क्या कार्य होता है? जवाब : वीर्य का अर्थ होता है ऊर्जा। वीर्य यानी सीमेन में नया शरीर पैदा करने की क्षमता होने के अलावा इसका एक प्रमुख कार्य संतानोत्पत्ति भी है। वीर्य का दूसरा महत्वपूर्ण कार्य पुरुष के शरीर में एनर्जी, सेक्सुअल पॉवर, सुंदरता और निरोगता का संचार करना होता है। कैसे बनता वीर्य वीर्य यानी सीमेन एक तरल पदार्थ है, जो शरीर की दो मुख्य ग्रंथियों के स्त्राव से बनता है। अंडकोषों में शुक्राणु बनते हैं, जो पुरुष ग्रंथियों के स्त्राव से मिलकर वीर्य की रचना करते हैं। वीर्य का निर्माण ब्लड से नहीं होता है। सुश्रुत में लिखा है कि जो भोजन हम सेवन करते हैं, उससे रस तैयार होता है। इस रस से खून, खून से मांस, मांस से मेद, मेद से अस्थि, अस्थि से मज्जा, और मज्जा से वीर्य का निर्माण होता है। इसमें स्पर्म (शुक्राणु), फ्रुक्टोज और अन्य एंजाइम होते हैं, जो शुक्राणु को सफल निषेचन हेतु जीवित रहने में मदद करते हैं।सीमन में स्पर्म तैरते हैं। एक बार स्त्री योनि में डिस्चार्ज होने के बाद स्पर्म निषेचन के लिए एग से मिलने को दौड़ लगा देते हैं। स्पर्म के एग से मिलने के बाद ही भ्रूण का निर्माण होता है और महिला प्रेग्नेंट होती है। इस गलतफहमी को दूर करें अधिकांश पुरुषों का मानना है कि वीर्य संग्रह से पुरुष बलवान बनता है और उसमें एक्सरसाइज करने की ज्यादा शक्ति आती है। दूसरी धारणा यह है कि संभोग करने से इस शक्ति का क्षय होता है, जिसके कारण थकान और कमजोरी महसूस होती है। उपरोक्त दोनों ही धारणाएं बिलकुल गलत है। सच्चाई तो यह है कि संभोग करने के बाद पुरुष को मानसिक दबाव और ब्लड सर्कुलेशन की तीव्रता के कारण थकान और कमजोरी महसूस होती है। वीर्य का निर्माण लगातार होता रहता है पुरुष जननांगों में वीर्य का निर्माण लगातार होता रहता है। इसका निरंतर बनना यही दर्शाता है कि इसे संभोग के दौरान बाहर अवश्य स्खलित किया जाए, न कि शरीर के अंदर इसको संग्रहीत करके रखा जाना चाहिए। इसे इस उदाहरण से समझने की कोशिश करें, जब पानी की टंकी लबालब भर जाती है तो उसे थोड़ा सा खाली करने के लिए नल खोलकर पानी बहा दिया जाता है, उसी प्रकार वीर्य की व्यर्थ मात्रा भी स्वप्नदोष के जरिए या संभोग के माध्यम से शरीर से बाहर निकल कर बह जाता है।
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