मेरे बार-बार गर्भपात हो जाने का कारण क्या है?

मेरे बार-बार गर्भपात हो जाने का कारण क्या है?
डॉ. चारु पंत स्त्री रोग विशेषज्ञ, निदान क्लीनिक, लक्ष्मी नगर,नई दिल्ली। सवाल: मेरी उम्र 32 वर्ष है और शादी के पांच साल बाद भी हमें संतान सुख नहीं मिल सका है। मेरे पीरियड नियमित है, लेकिन मुझे तीन बार अपने-आप ही डेढ़-दो माह पूरे होते ही अबॉर्शन हो गया था। मैं जानना चाहती हूं कि मेरे बार-बार गर्भपात हो जाने का कारण क्या है? क्या मैं कभी मां बन सकूंगी या नहीं? अब तो मेरा मन सेक्स से भी उचटने लगा है। समझ में नहीं आता कि क्या करूं। कृपया मेरी समस्या का उचित समाधान करें। जवाब: सबसे पहली बात तो आप पॉजिटिव सोच रखें और आनेवाले कल का स्वागत करें। तीन या ज्यादा बार अपने आप गर्भपात हो जाने को कहते हैं और यह सौ में से किसी एक के साथ हो सकता है। किसी के लिए भी इस तरह बार-बार गर्भपात हो जाना तनावपूर्ण हो सकता है। अक्सर महिलाएं ऐसे में खुद को ही दोषी मानने लगती हैं और सही पारिवारिक सपोर्ट न मिलने पर डिप्रेशन का शिकार भी हो सकती हैं। ऐसे में पति-पत्नी का आपसी रिश्ता भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए सेक्स करते रहना जरूरी है। डॉक्टर से चेकअप करवाना चाहिएलगातार तीन या ज्यादा बार गर्भपात हो जाने पर डॉक्टर से चेकअप करवाना चाहिए। यदि महिला की उम्र 35 साल या उससे अधिक है या बच्चा इनफर्टिलिटी (बांझपन) के बाद ठहरा हो, तो दो अबॉर्शन के बाद जांच करवाना जरूरी हो जाता है। बार-बार गर्भपात के बहुत सारे कारण हो सकते हैं
  • अनुवांशिक: कभी-कभी माता या पिता के क्रोमोसोम की बनावट में कुछ खराबी () हो सकती है, जिससे उन्हें कोई परेशानी नहीं होती, पर शिशु में दिक्कत आ सकती है और अबॉर्शन हो सकता है।
  • हार्मोन: इंसुलिन, थायराइड और प्रोलैक्टिन के लेवल में असंतुलन से अबार्शन का खतरा बढ़ जाता है।
  • बच्चेदानी की बनावट: बच्चेदानी के अंदर झिल्ली (Uterine Septum), रसौली (Fibroid), या आकार में बदलाव () भी इसके कारण हो सकते हैं।
  • बच्चेदानी का मुंह ढीला होना ()
  • खून जमने की समस्या ()
  • मां की उम्र 35 वर्ष से ज्यादा होना।
  • कोई लंबी बीमारी, जैसे - हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज या गुर्दे की तकलीफ आदि भी गर्भपात के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
इलाज के विकल्पइलाज के लिए सही कारण का पता चलना जरूरी है। किसी कुशल गायनोकोलॉजिस्ट से अपना चेकअप करवाएं। डॉक्टर आपकी रूटीन जांच के अलावा कुछ खास टेस्ट भी करा सकते हैं। जैसे:-
  • डायबिटीज और थायराइड की जांच (हार्मोन लेवल के लिए)
  • खून जमने के रोग की जांच (Thrombotic Testing)
  • माता- पिता के क्रोमोसोम की जांच।
  • बच्चेदानी की बनावट के लिए पेल्विक अल्ट्रासाउंड और हिस्ट्रीस्कोपी।
पॉज़िटिव सोच रखेंकिसी-किसी महिला में बार-बार अबॉर्शन के लिए एक से ज्यादा कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं और उनका इलाज करने पर निदान संभव है। इसलिए जरूरी है कि हताश और निराश न हो। पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे को सपोर्ट करें, एक-दूसरे का संबल बनें, पॉज़िटिव सोच रखें। क्योंकि ऐसे में भी नॉर्मल प्रेग्नेंसी के चांस अबॉर्शन से ज्यादा होते हैं।

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